दर्दनाक दास्तान: पति ने करंट हादसे में गंवाया हाथ, बस से गिरने पर पत्नी को ब्रेन हेमरेज; तीन मासूम बच्चों के पालन-पोषण पर संकट
कमाने वाला पति बिस्तर पर, जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही पत्नी; बुजुर्ग माता-पिता और तीन छोटे बच्चों के सामने गहराया आर्थिक संकट
रिपोर्ट: कमरुद्दीन
शाइन टुडे @ मेली/सिवाना।
सिवाना उपखंड क्षेत्र के मेली गांव निवासी एक मजदूर परिवार पर मुसीबतों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि परिवार का भविष्य अंधकारमय हो गया है। परिवार का भरण-पोषण करने वाले अशोक कुमार के साथ 8 अगस्त को हुए करंट हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। हादसे में उन्हें अपना एक हाथ गंवाना पड़ा। शरीर के अन्य हिस्सों में भी गंभीर चोटें आई हैं, जिसके चलते वे घर पर बिस्तर पर पड़े हैं। इसी बीच उनकी पत्नी भी बस से गिरने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गईं और ब्रेन हेमरेज होने से जोधपुर में उपचाराधीन हैं। ऐसे में परिवार के तीन मासूम बच्चों के पालन-पोषण की चिंता अब सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
मजदूरी करते समय करंट की चपेट में आए अशोक कुमार
अशोक कुमार मजदूरी कर अपने परिवार का गुजारा करते थे। हर दिन की तरह 8 अगस्त को भी वे रोजगार की तलाश में घर से निकले थे। देवड़ा गांव में कमठा मजदूरी करते समय वे बिजली के तारों की चपेट में आ गए। करंट से वे बुरी तरह झुलस गए। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए पहले जोधपुर में कई दिनों तक उपचार कराया गया, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद परिजन उन्हें उपचार के लिए गुजरात के अहमदाबाद ले गए, जहां ऑपरेशन के दौरान उनका एक हाथ काटना पड़ा।
करंट हादसे में अशोक कुमार के दोनों पैरों, पीठ, कूल्हे और सिर में भी गंभीर चोटें आई हैं। शारीरिक रूप से असहाय होने के कारण वे फिलहाल घर पर बिस्तर पर हैं। मजदूरी करके परिवार चलाने वाले अशोक कुमार के सामने अब खुद के उपचार के साथ परिवार की जिम्मेदारी निभाने का संकट खड़ा हो गया है।
पत्नी को भी ब्रेन हेमरेज, जोधपुर में चल रहा उपचार
परिवार की परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुईं। अशोक कुमार के अनुसार, कुछ दिन पहले उनकी पत्नी एक सामाजिक कार्यक्रम से बस में सवार होकर घर लौट रही थीं। इसी दौरान वे बस से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया। फिलहाल उनका जोधपुर में उपचार चल रहा है।
एक ओर पति गंभीर रूप से घायल होकर घर पर बिस्तर पर हैं, तो दूसरी ओर पत्नी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। परिवार के लिए यह दोहरी विपदा असहनीय साबित हो रही है।
तीन मासूम बच्चों के भविष्य की चिंता
अशोक कुमार के परिवार में उनकी पत्नी, बुजुर्ग माता-पिता और तीन छोटे बच्चे हैं। बच्चों में खुशाल की उम्र 5 वर्ष, ललित की 4 वर्ष और लोसना की उम्र महज 1 वर्ष है। इतनी कम उम्र में इन बच्चों को माता-पिता के उपचार और परिवार की आर्थिक तंगी जैसी गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
परिवार की आय का मुख्य सहारा मजदूरी थी, लेकिन हादसे के बाद अशोक कुमार काम करने में असमर्थ हैं। पत्नी के उपचार का खर्च और तीनों बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। ऐसे हालात में बुजुर्ग माता-पिता और मासूम बच्चों की देखभाल कैसे होगी, यह परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
ग्रामीणों ने शुरू की मदद की मुहिम, सरकारी सहायता की आस
पीड़ित परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए गांव के ग्रामीणों ने अपने स्तर पर सहयोग जुटाने की मुहिम शुरू की है, ताकि संकट की इस घड़ी में परिवार को कुछ राहत मिल सके। वहीं, पीड़ित परिवार ने श्रम विभाग से श्रमिक सहायता तथा पात्रतानुसार सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की गुहार लगाई है।
परिवार को अब आर्थिक सहयोग और सरकारी सहायता की दरकार है, जिससे अशोक कुमार के उपचार, पत्नी के इलाज और तीनों मासूम बच्चों के पालन-पोषण में मदद मिल सके। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग और सक्षम लोग आगे आकर पीड़ित परिवार की मदद करें, ताकि विपरीत परिस्थितियों में परिवार को सहारा मिल सके और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
