गरीब, किसान और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की आवाज थे पूर्व उपराष्ट्रपति शेखावत: बांठिया
बालोतरा। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्य समिति सदस्य व ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (GRAM) रथ के पचपदरा विधानसभा के प्रभारी गणपत बांठिया ने असंख्य कार्यकर्ताओं के प्रेरणा-पुंज, भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष, देश के पूर्व उप राष्ट्रपति, 'राजस्थान गौरव' परम श्रद्धेय भैरोंसिंह शेखावत जी की पुण्यतिथि पर पर श्रद्धेय बाबोसा को कृतज्ञतापूर्वक नमन कर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्य समिति सदस्य व ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (GRAM) रथ के पचपदरा विधानसभा के प्रभारी गणपत बांठिया ने कहा कि राष्ट्रोत्थान और जन-कल्याण हेतु समर्पित आपका सम्पूर्ण जीवन सदैव हम सभी को माँ भारती की सेवा हेतु कर्तव्य पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता रहेगा।भैरोंसिंह शेखावत जी केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि वे करोड़ों कार्यकर्ताओं की प्रेरणा, गरीब और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज तथा सुशासन के प्रतीक थे। साधारण परिवार से निकलकर देश
के उपराष्ट्रपति पद तक पहुँचना उनके संघर्ष, परिश्रम और जनसेवा के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने राजनीति को हमेशा सेवा का माध्यम माना और अपने कार्यों से यह सिद्ध किया कि ईमानदारी, संवेदनशीलता और दृढ़ इच्छाशक्ति से जनमानस का विश्वास जीता जा सकता है।राजस्थान के विकास में उनका योगदान सदैव स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। प्रदेश में सुशासन, ग्रामीण विकास, जल संरक्षण, शिक्षा और गरीब कल्याण की दिशा में उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी प्रेरणास्रोत हैं। वे कार्यकर्ताओं का सम्मान करने वाले, सबको साथ लेकर चलने वाले और संगठन को परिवार मानने वाले अद्वितीय व्यक्तित्व थे।उन्होंने ने कहा कि देश मे काम के बदले अनाज योजना, अंत्योदय योजना के प्रणेता पूर्व राष्ट्रपति एवं राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे स्व भैरोें सिंह शेखावत ही ऐसे नेक कार्य कर सके।उन्होंने ने उनको याद करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत के साथ जनसंघ के नेता पूर्व विधायक चंपालाल बांठिया के साथ वार्ता करते व उनके भाषणों को सुनने के जन सैलाब उमड़ता था। अकाल के उस भयानक दौर में पूर्व विधायक चंपालाल बांठिया के साथ मिलकर सीमान्त जिलो के गांव गांव ढाणी ढाणी जाकर ग्रामीणों से रूबरू हुए थे।उन्होंने ने कहा कि शेखावत आम जन मानस के दुखों को अपना दुख मानकर उनकी सेवा की थी।
