शाहदा में गुरुदेव श्री द्वारा सुघोषा घंटाकर्ण जिनमंदिर दर्शन-वंदन
शाइन टुडे न्यूज नेटवर्क @शाहदा नगर महाराष्ट्र: परम पूज्य सूरि सम्राट राष्ट्ररत्न अवंति तीर्थोद्धारक खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा., पूज्य गणिवर्य श्री मयंकप्रभसागरजी म.सा.,पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म.सा. आदि ठाणा 3 की पावन निश्रा में महाराष्ट्र के शाहदा नगर में दिनांक 4 मई 2026 को संध्या में पूज्य श्री का मंगलमय पदार्पण हुआ। उनके आगमन पर नगरवासियों द्वारा भावभीना एवं श्रद्धापूर्ण स्वागत किया गया। तत्पश्चात् पूज्य श्री ने सुघोषा घंटाकर्ण में निर्मित जिनमंदिर के दर्शन-वंदन किए, जो उनकी पावन प्रेरणा से ही सम्पन्न हुआ था। इसके उपरांत आयोजित धर्मसभा में पूज्य गुरुदेव श्री ने फरमाया कि सुघोषा घंट का प्रसंग हमें यह संदेश देता है कि जैसे पूर्वकाल में इन्द्र महाराज का संदेश हरिणगमैषी देव द्वारा उस दिव्य घंट के माध्यम से समस्त देवों तक पहुँचता था, वैसे ही हमारे भीतर भी एक सूक्ष्म अंतःआवाज होती है, जो हमें सही दिशा और आत्मकल्याण की ओर प्रेरित करती है।
गुरुदेव श्री के पावन आगमन से तलोदा में छाया धर्ममय वातावरण:
परम पूज्य गुरुदेव सूरि सम्राट राष्ट्ररत्न अवंति तीर्थोद्धारक खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा., पूज्य गणिवर्य श्री मयंकप्रभसागरजी म.सा., पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म.सा. आदि ठाणा 3 की पावन निश्रा में दिनांक 5 मई 2026 को महाराष्ट्र के तलोदा नगर में गुरुदेव श्री का मंगलमय प्रवेश सम्पन्न हुआ। इसके उपरांत आयोजित धर्मसभा में पूज्य गुरुदेव श्री ने फरमाया कि यह स्थान उन्हें अत्यंत प्रिय है तथा गुरु महाराज का यहाँ विशेष आगमन रहा है। उनकी पावन प्रेरणा से ही यहाँ शांतिनाथ जिनमंदिर का निर्माण हुआ था तथा खेतिया में भी उनके मार्गदर्शन से कार्य सम्पन्न हुआ था। इसी क्रम में ट्रस्ट मंडल का पुर्नगठन भी किया गया, जिसमें नवीन दायित्वों की घोषणा की गई। तत्पश्चात् पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म.सा. ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण ही जीवन की सच्ची पूंजी है और प्रत्येक शिष्य को आदर्श समर्पण भाव अपनाना चाहिए। इस प्रकार गुरु महिमा का भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी वर्णन किया गया। इस पावन अवसर पर स्थानीय सहित नंदुरबार, वाण्याविहिर, सूरत आदि विभिन्न स्थानों से पधारे श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके पश्चात् पूज्य गुरुदेव श्री यहाँ से अक्कलकुंवा की ओर दीक्षा हेतु प्रस्थान करेंगे।
