दंताला शरीफ़ दरगाह पर सालाना उर्स सम्पन्न – अकीदतमंदों का उमड़ा सैलाब, रूहानी माहौल से गूँजा इलाक़ा
रिपोर्ट:कमरुद्दीन
सिवाना (बालोतरा)। मालानी की सरज़मीन पर स्थित दरगाह हज़रत सैय्यद सुल्तानशाह जीलानी रहमतुल्लाह अलैह (दंताला शरीफ़) पर गुरुवार, 28 अगस्त 2025 (5 रब्बीउल अव्वल 1447 हिजरी) को सालाना उर्स मुबारक का समापन हुआ। यह मुक़द्दस उर्स केवल एक धार्मिक इज्तिमा ही नहीं बल्कि अकीदत, मोहब्बत और इंसानियत का पैग़ाम लेकर आता है। उर्स के मौक़े पर सिवाना, बालोतरा, बाड़मेर, जालोर, जोधपुर, पाली समेत राजस्थान के विभिन्न हिस्सों और गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली तक से हज़ारों जायरीन पहुँचे और दरगाह पर हाज़िरी दी।
मिलाद और तक़रीरों से हुआ आग़ाज़
उर्स का आग़ाज़ बुधवार रात नमाज़-ए-इशा के बाद महफ़िले मिलाद से किया गया। इस महफ़िल की सरपरस्ती शहजादए गौस-ए-आजम सय्यद अताउल्लाह शाह जीलानी ने की। उन्होंने अपने ख़ुत्बे में कहा कि औलिया-ए-किराम की ज़िंदगियाँ इंसानियत और अमन का पैग़ाम देती हैं। वहीं, लूनी शरीफ़ से तशरीफ़ लाए अहले सुन्नत के नामवर आलिम प्रो. मौलाना सय्यद सिकंदर अली शाह जीलानी ने अपने ख़ास बयान में हज़रत सैय्यद सुल्तानशाह जीलानी की ख़िदमात और उनकी रूहानी तालीमात पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि औलिया की महफ़िलें समाज में मोहब्बत और भाईचारे को मज़बूत करती हैं।
कव्वाली से रौनक – कमर वारसी की पहली पेशकश
उर्स की सबसे ख़ास महफ़िल कव्वाली रही। पहली बार लखनऊ से आए मशहूर सिंगर कमर वारसी ने दंताला शरीफ़ की महफ़िल में अपनी सुरीली आवाज़ पेश की। उनकी कव्वालियों पर अकीदतमंद झूम उठे। इसके अलावा इरफान तुफैल (जोधपुर) और अन्य कव्वालों ने भी एक से बढ़कर एक कलाम पेश किए। देर रात तक चली इस महफ़िल में ‘हम्द, नात और मनक़बत’ से पूरा माहौल रूहानी रंग में रंग गया।
ज़ायरिनों के लिए मुकम्मल इंतज़ाम
उर्स वक्फ कमेटी दंताला शरीफ़ की जानिब से जायरीन के लिए बेहतर इंतज़ाम किए गए। पानी, बिजली, रोशनी, चिकित्सा सेवाएँ, बैठने की सुविधा और महिलाओं के लिए अलग से व्यवस्था की गई। कमेटी की निगरानी में बाहर से आए मेहमानों और जायरीन के लिए लंगर का भी सिलसिला चलता रहा, जिसमें हज़ारों लोगों ने तबर्रुक हासिल किया।
रूहानी जोश और सामाजिक पैग़ाम
आज के उर्स मुबारक के दौरान दंताला शरीफ़ का माहौल पूरी तरह रूहानियत से सराबोर रहा। जायरीन ने दरगाह पर फ़ातिहा पढ़कर मुल्क और क़ौम की सलामती, अमन और तरक़्क़ी की दुआ मांगी। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ उर्स का यह मौक़ा सामाजिक मेल-मिलाप का भी केंद्र बना। विभिन्न क़स्बों और गाँवों से आए लोग आपस में गले मिले और एक-दूसरे को उर्स की मुबारकबाद दी।
औलिया की तालीमात पर अमल की ज़रूरत
उर्स की महफ़िलों में यह पैग़ाम दिया गया कि औलिया-ए-किराम की तालीमात इंसानियत, मोहब्बत और अमन का रास्ता दिखाती हैं। मौलाना ने कहा कि अगर समाज इन तालीमात पर अमल करे तो नफ़रत और तंगनज़री की दीवारें टूट सकती हैं। वहीं दंताला शरीफ़ का सालाना उर्स अकीदतमंदों के लिए रूहानी सौग़ात और बरकत लेकर समाप्त हुआ। इलाक़े में अगले कई दिनों तक उर्स की गूँज और इसकी रूहानी फिज़ा का असर महसूस किया जाएगा।