आश्विन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी पर जसोल धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, भजनों एवं जयकारों से गूँजा मंदिर परिसर, नवीन व्यवस्था के अनुरूप छप्पन भोग अर्पण एवं कन्या पूजन का हुआ आयोजन
जसोल, 25 अक्टूबर 2026। आश्विन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी, रविवार के पावन अवसर पर श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल में श्रद्धा एवं आस्था का सैलाब उमड़ा। प्रातःकालीन मंगला आरती से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर जगत जननी राजराजेश्वरी श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाईसिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी एवं श्री काला-गौरा भैरूजी के मंदिरों में विधि-विधानपूर्वक दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा अपने एवं परिवार के सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की मंगलकामना की।
दिनभर संपूर्ण मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। श्री राणीसा भटियाणीसा सहित समस्त आराध्य देवी-देवताओं की महिमा पर आधारित सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियों से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। वहीं, माँ जसोल के गगनभेदी जयकारों से संपूर्ण मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए संस्थान द्वारा सुगम दर्शन, कतार प्रबंधन, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यापक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गईं, जिससे श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित एवं सुविधाजनक रूप से दर्शन लाभ प्राप्त हो सके।
छप्पन भोग एवं भोजन-प्रसादी अर्पण की नवीन व्यवस्था लागू
श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, मंदिरों की पवित्रता एवं धार्मिक परंपराओं के सुव्यवस्थित संचालन को प्राथमिकता देते हुए संस्थान द्वारा छप्पन भोग एवं भोजन-प्रसादी भोग अर्पण की व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया है। पूर्व में छप्पन भोग एवं भोजन-प्रसादी भोग के लाभार्थी परिवार स्वयं मंदिरों के भीतर प्रवेश कर अपने हाथों से आराध्य देवी-देवताओं को भोग अर्पित करते थे। अब नवीन व्यवस्था के अंतर्गत लाभार्थी परिवारों द्वारा छप्पन भोग एवं भोजन-प्रसादी भोग की सामग्री संबंधित मंदिरों के बाहर निर्धारित स्थान पर पुजारियों को सौंपी जाती है। इसके पश्चात संबंधित मंदिरों के पुजारी स्वयं भोग सामग्री को मंदिरों के भीतर ले जाकर धार्मिक परंपराओं एवं विधि-विधान के अनुसार आराध्य देवी-देवताओं को भोग अर्पित करते हैं। भोग अर्पण की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात पुजारी प्रसाद को पुनः मंदिरों के बाहर उपस्थित लाभार्थी परिवारों को ससम्मान सुपुर्द करते हैं। इसके बाद लाभार्थी परिवारों द्वारा प्रसाद का वितरण श्रद्धालुओं में किया जाता है। इस व्यवस्था से मंदिरों के भीतर धार्मिक अनुष्ठानों की मर्यादा, पवित्रता एवं सुव्यवस्था बनाए रखने के साथ सुरक्षा एवं सुविधा भी सुनिश्चित की जा रही है। संस्थान ने समस्त श्रद्धालुओं एवं भावी लाभार्थी परिवारों से इस नवीन व्यवस्था का पालन कर सहयोग करने की अपील की है।
नवीन व्यवस्था के अंतर्गत समस्त मंदिरों में छप्पन भोग अर्पित
इसी नवीन व्यवस्था के अंतर्गत चतुर्दशी के पावन अवसर पर मुंबई निवासी छप्पन भोग लाभार्थी लीला देवी एवं रमेश कुमार, बन्दा मुथा मोरसीम द्वारा श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाईसिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी एवं श्री काला-गौरा भैरूजी के मंदिरों में श्रद्धाभाव से छप्पन भोग अर्पित करवाया गया। लाभार्थी परिवार ने समस्त मंदिरों के बाहर निर्धारित स्थानों पर छप्पन भोग के व्यंजन संबंधित पुजारियों को सौंपे। पुजारियों द्वारा मंदिरों के भीतर विधि-विधानपूर्वक भोग अर्पित करने के पश्चात प्रसाद पुनः लाभार्थी परिवार को सुपुर्द किया गया। इसके उपरांत परिवार द्वारा जसोल धाम पधारे श्रद्धालुओं में प्रसाद का श्रद्धापूर्वक वितरण किया गया।
सर्वसमाज की कन्याओं का विधि-विधानपूर्वक पूजन
इस पावन अवसर पर लाभार्थी परिवार द्वारा सर्वसमाज की कन्याओं का विधि-विधानपूर्वक पूजन किया गया। कन्याओं को फल, प्रसाद एवं दक्षिणा अर्पित कर ससम्मान भोजन-प्रसादी ग्रहण करवाई गई तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। कन्या पूजन एवं प्रसाद वितरण के माध्यम से सनातन संस्कृति की सेवा, श्रद्धा, समर्पण एवं धार्मिक परंपराओं का सुंदर स्वरूप देखने को मिला।
रात्रि जागरण में भजनों की प्रस्तुतियों से भक्तिमय बना वातावरण
जसोल धाम में श्रद्धालुओं का आवागमन निरंतर जारी है। प्रतिदिन आयोजित होने वाले रात्रि जागरण में श्री राणीसा भटियाणीसा सहित समस्त आराध्य देवी-देवताओं की महिमा का भजनों के माध्यम से गुणगान किया जा रहा है। भजनियों की सुमधुर प्रस्तुतियों एवं भक्तिमय भजनों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं। संस्थान द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता एवं सुगम दर्शन व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ निरंतर संचालित की जा रही हैं।
